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व्यावहारिक व्याकरण — अध्ययन-नोट्स

6 sections 9 min readBeta

1. उपवाक्य और रचना के आधार पर वाक्य के भेद

जिस शब्द-समूह का अपना कर्ता और अपनी समापिका क्रिया हो, वह उपवाक्य है। जो उपवाक्य अकेले पूरा अर्थ दे, वह प्रधान उपवाक्य; जो उस पर निर्भर हो, वह आश्रित उपवाक्य।

रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं:

  • सरल वाक्य — एक उद्देश्य, एक विधेय (एक समापिका क्रिया)। "-कर", "-ते ही", "-ने पर" वाली असमापिका क्रियाएँ गिनी नहीं जातीं। उदाहरण: "बस से उतरकर राहुल सीधा कक्षा में गया।"
  • संयुक्त वाक्य — दो या अधिक स्वतंत्र उपवाक्य, समानाधिकरण योजकों (और, तथा, एवं, या, अथवा, पर, परंतु, किंतु, लेकिन, बल्कि, फिर भी, इसलिए, अतः, नहीं तो) से जुड़े। उदाहरण: "घंटी बजी और सब बच्चे बाहर निकल आए।"
  • मिश्र वाक्य — एक प्रधान और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य, व्यधिकरण योजकों (कि, जो…वह, जब…तब, जैसे ही…वैसे ही, जहाँ…वहाँ, यदि…तो, क्योंकि, चूँकि, ताकि, यद्यपि…तथापि) से जुड़े। उदाहरण: "माँ ने कहा कि आज खीर बनेगी।"

आश्रित उपवाक्य के भेद (प्रधान उपवाक्य से प्रश्न पूछकर पहचानें):

  • संज्ञा उपवाक्य (क्या?) — प्रायः "कि" से: "पापा चाहते हैं कि मैं तैरना सीखूँ।"
  • विशेषण उपवाक्य (कौन-सा?) — जो, जिसे, जिसका: "वह साइकिल, जो लाल रंग की है, मेरी है।"
  • क्रियाविशेषण उपवाक्य (कब/कहाँ/क्यों/किस शर्त पर?) — जब, जहाँ, यदि, क्योंकि, ताकि: "जहाँ पेड़ अधिक होते हैं, वहाँ वर्षा अच्छी होती है।"

मुख्य शब्द

समापिका क्रिया

वह क्रिया जो वाक्य को पूरा करती है — जैसे "गया", "खाती है"। "खाकर", "देखते ही" असमापिका हैं।

समानाधिकरण योजक

बराबर स्तर के (स्वतंत्र) उपवाक्यों को जोड़ने वाले योजक — और, पर, या, इसलिए; इनसे संयुक्त वाक्य बनता है।

व्यधिकरण योजक

आश्रित उपवाक्य को प्रधान उपवाक्य से जोड़ने वाले योजक — कि, जो, जब…तब, यदि…तो, क्योंकि; इनसे मिश्र वाक्य बनता है।

2. वाक्य-रूपांतरण

रूपांतरण में अर्थ और काल नहीं बदलते, केवल वाक्य की बनावट बदलती है।

सेमेंविधिउदाहरण
सरलसंयुक्तअसमापिका क्रिया को समापिका बनाकर "और/इसलिए" लगाएँ"टिकट ख़रीदकर हम रेलगाड़ी में बैठ गए।" → "हमने टिकट ख़रीदा और रेलगाड़ी में बैठ गए।"
सरलमिश्र"-ते ही" → जैसे ही…वैसे ही; "-ने पर" → जब…तब; विशेषण → जो…वह"परिश्रमी छात्र सफल होते हैं।" → "जो छात्र परिश्रमी होते हैं, वे सफल होते हैं।"
संयुक्तसरलयोजक हटाकर एक क्रिया को "-कर / -ने के कारण" बनाएँ"भाई बीमार था, इसलिए विद्यालय नहीं आया।" → "बीमार होने के कारण भाई विद्यालय नहीं आया।"
मिश्रसंयुक्तव्यधिकरण योजक हटाकर "और/इसलिए" लगाएँ"जब सूरज डूबा, तब किसान घर लौटे।" → "सूरज डूबा और किसान घर लौटे।"

जाँच-सूची: (1) क्या नए वाक्य का प्रकार वही है जो माँगा गया? (2) क्या काल वही है? (3) क्या पूरा वाक्य, सही वर्तनी और पूर्ण विराम (।) के साथ लिखा है?

मुख्य शब्द

वाक्य-रूपांतरण

अर्थ बदले बिना वाक्य को एक रचनागत प्रकार (सरल/संयुक्त/मिश्र) से दूसरे में बदलना।

3. वाच्य और उसके भेद

क्रिया के जिस रूप से पता चले कि वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में से किसकी प्रधानता है, उसे वाच्य कहते हैं।

  • कर्तृवाच्य — कर्ता प्रधान। "सीमा पत्र लिखती है।" ध्यान दें: सकर्मक क्रिया के भूतकाल में "ने" लगने पर क्रिया कर्म के अनुसार चलती है ("सीमा ने पत्र लिखा"), फिर भी वाक्य कर्तृवाच्य ही है।
  • कर्मवाच्य — कर्म प्रधान; केवल सकर्मक क्रिया से। कर्ता के साथ से / के द्वारा, क्रिया के साथ "जाना", लिंग-वचन कर्म के अनुसार। "सीमा द्वारा पत्र लिखा गया।"
  • भाववाच्य — भाव प्रधान; केवल अकर्मक क्रिया से। कर्ता के साथ से, क्रिया के साथ "जाना", क्रिया सदा अन्य पुरुष, पुल्लिंग, एकवचन। प्रायः असमर्थता/निषेध। "सीमा से चला नहीं जाता।"

पहचान का जाल: "दादी से सीढ़ियाँ नहीं चढ़ी जातीं" में "से" और "नहीं" हैं, पर कर्म "सीढ़ियाँ" उपस्थित है और क्रिया उसी के अनुसार है — अतः कर्मवाच्य।

तालिका: तीनों वाच्यों में क्रिया का प्रकार, कर्ता के साथ लगने वाला चिह्न और क्रिया किसके अनुसार चलती है
वाच्यक्रिया का प्रकारकर्ता के साथक्रिया किसके अनुसार
कर्तृवाच्यसकर्मक या अकर्मकबिना चिह्न या "ने"कर्ता के ("ने" हो तो कर्म के)
कर्मवाच्यकेवल सकर्मकसे / के द्वाराकर्म के
भाववाच्यकेवल अकर्मकसेसदा अन्य पुरुष, पुल्लिंग, एकवचन

मुख्य शब्द

कर्तृवाच्य

कर्ता प्रधान; क्रिया कर्ता के अनुसार (या "ने" लगने पर कर्म के अनुसार)।

कर्मवाच्य

कर्म प्रधान; से/के द्वारा + जाना; सकर्मक क्रिया; क्रिया कर्म के अनुसार।

भाववाच्य

भाव प्रधान; से + जाना; अकर्मक क्रिया; क्रिया अन्य पुरुष, पुल्लिंग, एकवचन।

4. वाच्य-परिवर्तन के नियम

कर्तृवाच्य → कर्मवाच्य

  1. कर्ता के साथ "से" या "के द्वारा" लगाएँ ("मैं" → "मुझसे/मेरे द्वारा")।
  2. मुख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल के रूप में लाएँ (लिख → लिखा)।
  3. "जाना" क्रिया का रूप जोड़ें; काल मूल वाक्य का और लिंग-वचन कर्म का।

उदाहरण: "किसान फ़सल काटते हैं।" → "किसानों द्वारा फ़सल काटी जाती है।" · "हम लोग एक पत्र लिखेंगे।" → "हम लोगों द्वारा एक पत्र लिखा जाएगा।"

कर्तृवाच्य → भाववाच्य (अकर्मक क्रिया)

  1. कर्ता के साथ "से" लगाएँ।
  2. मुख्य क्रिया का भूतकालिक रूप + "जाना"।
  3. क्रिया अन्य पुरुष, पुल्लिंग, एकवचन।

उदाहरण: "मैं गर्मी में दोपहर को सो नहीं पाता।" → "मुझसे गर्मी में दोपहर को सोया नहीं जाता।"

कर्मवाच्य/भाववाच्य → कर्तृवाच्य "से/द्वारा" हटाएँ, "जाना" हटाएँ; भूतकाल-सकर्मक में "ने" लगाएँ; असमर्थता के लिए "पाना/सकना" लगाएँ। "अध्यापक द्वारा उत्तर-पुस्तिकाएँ जाँची गईं।" → "अध्यापक ने उत्तर-पुस्तिकाएँ जाँचीं।" · "रोगी से उठा नहीं जाता।" → "रोगी उठ नहीं पाता।"

मुख्य शब्द

वाच्य-परिवर्तन

अर्थ और काल बनाए रखते हुए वाक्य को एक वाच्य से दूसरे वाच्य में बदलना।

5. पद परिचय

वाक्य में प्रयुक्त शब्द पद है। पद का पूरा व्याकरणिक परिचय देना पद परिचय है। भेद हमेशा वाक्य में पद के काम से तय करें।

हल किया उदाहरण — "निधि ने बाज़ार से ताज़े फल ख़रीदे।"

  • निधि ने — व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक, "ख़रीदे" क्रिया की कर्ता।
  • बाज़ार से — जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, अपादान कारक।
  • ताज़े — गुणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, बहुवचन, विशेष्य "फल"।
  • ख़रीदे — सकर्मक क्रिया, पुल्लिंग, बहुवचन, सामान्य भूतकाल, कर्तृवाच्य।

ध्यान रखें:

  • "वह/यह" अकेले आए तो सर्वनाम; संज्ञा से पहले आए ("यह पुस्तक") तो सार्वनामिक विशेषण।
  • "से" साधन बताए तो करण, अलग होना बताए तो अपादान।
  • "को" क्रिया का फल पाने वाले के साथ कर्म, देने के भाव में संप्रदान।
  • लिंग पर संदेह हो तो वाक्य की क्रिया/विशेषण देखें ("मैं कहानी सुनाऊँगी" → स्त्रीलिंग)।
तालिका: पद परिचय में हर पद-भेद के लिए लिखे जाने वाले बिंदु
पदलिखने के बिंदु
संज्ञाभेद, लिंग, वचन, कारक, क्रिया से संबंध
सर्वनामभेद, पुरुष (पुरुषवाचक में), लिंग, वचन, कारक, संबंध
विशेषणभेद, लिंग, वचन, विशेष्य
क्रियाभेद, लिंग, वचन, काल, वाच्य, कर्ता/कर्म
क्रियाविशेषणभेद, विशेषित क्रिया
संबंधबोधक / समुच्चयबोधक / विस्मयादिबोधकभेद, जोड़े गए शब्द या भाव

मुख्य शब्द

पद

वाक्य में प्रयुक्त, व्याकरण के नियमों में बँधा शब्द।

विशेष्य

वह संज्ञा या सर्वनाम जिसकी विशेषता विशेषण बताता है।

सार्वनामिक विशेषण

संज्ञा से पहले आकर विशेषण का काम करने वाला सर्वनाम — "वह लड़का", "यह पुस्तक"।

6. अलंकार: उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, मानवीकरण

काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्व अलंकार हैं। पाठ्यक्रम के पाँचों अर्थालंकार हैं।

  • उपमा — उपमेय की उपमान से समानता; वाचक: सा, सी, से, सम, समान, सरिस, जैसा, ज्यों, तुल्य। "माँ की ममता सागर-सी गहरी है।"
  • रूपक — उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप; वाचक शब्द नहीं। "धैर्य की पतवार से जीवन-नैया पार लगाओ।"
  • उत्प्रेक्षा — उपमेय में उपमान की संभावना; वाचक: मानो, मनो, मनु, जनु, जानो, मनहुँ, जनहुँ। "लाल गुलमोहर ऐसा दहक रहा था मानो पेड़ पर आग लगी हो।"
  • अतिशयोक्ति — बात को लोक-सीमा से बढ़ा-चढ़ाकर कहना। "घोड़ा इतना तेज़ भागा कि उसकी परछाईं पीछे छूट गई।"
  • मानवीकरण — प्रकृति/निर्जीव पर मानवीय भावों और क्रियाओं का आरोप। "थकी हुई नदी चुपचाप सागर की गोद में सो गई।"

उत्तर लिखने का ढाँचा: अलंकार का नाम + कारण (वाचक शब्द / उपमेय-उपमान / मानवीय क्रिया)।

सावधान: "थोड़ा-सा", "ज़रा-सी" में "सा/सी" तुलना नहीं करते — वहाँ उपमा नहीं है।

तालिका: पाँचों अलंकारों का आधार और पहचान के संकेत
अलंकारआधारसंकेत
उपमासमानता (जैसा है)सा, सी, समान, जैसा
रूपकअभेद (वही है)योजक-चिह्न, "रूपी"
उत्प्रेक्षासंभावना (मानो वही हो)मानो, जनु, मनु
अतिशयोक्तिअसंभव बढ़ा-चढ़ाकर"इतना…कि" + असंभव परिणाम
मानवीकरणमानवीय गुणों का आरोपनिर्जीव/प्रकृति + मानवीय क्रिया

मुख्य शब्द

उपमेय

जिसकी तुलना की जाए या जिसका वर्णन हो — "मन मक्खन-सा कोमल" में "मन"।

उपमान

जिससे तुलना की जाए — "मक्खन"।

साधारण धर्म

उपमेय और उपमान में समान गुण — "कोमल"।

वाचक शब्द

तुलना/संभावना बताने वाला शब्द — "सा" (उपमा), "मानो" (उत्प्रेक्षा)।

परीक्षा सुझाव

खंड ख (व्याकरण) — 16 अंक: चार उपविषयों (वाक्य भेद, वाच्य, पद परिचय, अलंकार) से 5-5 प्रश्न आते हैं; हर उपविषय में 4 प्रश्न करने होते हैं, प्रत्येक 1 अंक का।

अंक कैसे मिलते हैं

  • रूपांतरण: पूरा, सही वाक्य = 1 अंक। केवल योजक या आधा वाक्य = 0।
  • आश्रित उपवाक्य: उपवाक्य छाँटना + भेद लिखना — दोनों पर अंक।
  • पद परिचय: भेद + शेष सभी बिंदु (लिंग, वचन, कारक/विशेष्य/काल-वाच्य) = 1 अंक।
  • अलंकार: नाम (+ जहाँ पूछा जाए, कारण)।

आम गलतियाँ

  1. "-कर / -ते ही" वाले वाक्य को संयुक्त या मिश्र लिखना (वह सरल है)।
  2. "इसलिए" को व्यधिकरण मानकर मिश्र लिखना (वह समानाधिकरण है — संयुक्त)।
  3. "ने" वाले वाक्य को कर्मवाच्य लिखना।
  4. भाववाच्य में "उड़ी गई", "सोईं गईं" जैसी स्त्रीलिंग/बहुवचन क्रिया लिखना।
  5. वाच्य/वाक्य-रूपांतरण में काल बदल देना।
  6. "वह लड़का" में "वह" को सर्वनाम लिखना (सार्वनामिक विशेषण है)।
  7. "मानो" वाली पंक्ति को उपमा और "के समान" वाली पंक्ति को रूपक लिखना।
  8. वर्तनी की भूल — मानक रूप कर्तृवाच्य, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति और मानवीकरण ही लिखें; मात्रा या संयुक्ताक्षर बदलने पर अंक कट सकते हैं।