Skip to content
Skip to page content
soylai.com

संगतकार — मंगलेश डबराल: नोट्स

7 sections 7 min readBeta

1. कवि-परिचय: मंगलेश डबराल

ध्यान दें: यह कविता अपनी पाठ्यपुस्तक क्षितिज भाग 2 (NCERT) में अवश्य पढ़ें। यहाँ केवल SOYL की व्याख्या है; कविता की कोई पंक्ति यहाँ नहीं दी गई है।

मंगलेश डबराल (1948–2020) का जन्म उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल ज़िले के काफलपानी गाँव में हुआ; पढ़ाई देहरादून में हुई। वे जीवन भर पत्रकारिता और संपादन से जुड़े रहे: दिल्ली में पत्रकारिता की शुरुआत, भोपाल में भारत भवन की पत्रिका पूर्वग्रह, और बाद में जनसत्ता में साहित्य संपादक। वे अनुवादक और गद्यकार भी थे।

कविता-संग्रह: पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं, आवाज़ भी एक जगह है।

सम्मान: हम जो देखते हैं पर साहित्य अकादमी पुरस्कार।

उनकी भाषा सीधी और साफ़ है, पर उसमें बारीक अनुभव और साधारण, अनदेखे लोगों के प्रति गहरी संवेदना है।

तालिका: मंगलेश डबराल — जीवन-काल उन्नीस सौ अड़तालीस से दो हज़ार बीस, जन्म टिहरी गढ़वाल के काफलपानी गाँव में, पढ़ाई देहरादून में, पत्रकारिता और संपादन, चार कविता-संग्रह और साहित्य अकादमी पुरस्कार।
बिंदुजानकारी
जीवन-कालसन् 1948 – 2020
जन्मकाफलपानी गाँव, टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड)
पढ़ाईदेहरादून
कार्यपत्रकारिता और संपादन; जनसत्ता में साहित्य संपादक
कविता-संग्रहपहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं, आवाज़ भी एक जगह है
सम्मानहम जो देखते हैं पर साहित्य अकादमी पुरस्कार
अन्यअनुवादक और गद्यकार

मुख्य शब्द

संगतकार

मुख्य गायक या वादक के साथ गाकर या बजाकर सहयोग करने वाला कलाकार।

मुक्त छंद

तुक और मात्रा के बंधन से स्वतंत्र, विचार की लय पर चलने वाली कविता।

2. कविता का प्रसंग और संगीत के शब्द

कविता संगीत-सभा के एक परिचित दृश्य से उठती है: तालियाँ प्रायः मुख्य गायक को मिलती हैं, पर उसके साथ एक संगतकार भी गाता है, जिसकी ओर कम ही ध्यान जाता है। कवि उसी के बहाने हर क्षेत्र के अनदेखे सहयोगियों की बात करते हैं।

कविता समझने के लिए संगीत के शब्द: स्थायी (गीत की टेक), अंतरा (स्थायी के बाद के चरण), तान (सुरों का तेज़ विस्तार), सरगम (सुरों का क्रम), तारसप्तक (सबसे ऊँचे सुर; मंद्र, मध्य और तार — तीन सप्तक होते हैं), अनहद (असीम नाद)।

ये शब्द कविता के संगीत-प्रसंग को समझने के लिए हैं।
संगीत का शब्दअर्थ
संगत / संगतकारमुख्य कलाकार के साथ गाकर या बजाकर सहयोग; ऐसा करने वाला कलाकार
स्थायीगीत की टेक, जो बार-बार लौटकर आती है
अंतरास्थायी के बाद आने वाले चरण
तानसुरों का तेज़, लहरदार विस्तार
सरगमसा, रे, ग, म, प, ध, नि — सुरों का क्रम
तारसप्तकसबसे ऊँचे सुरों का सप्तक
अनहदअसीम नाद; यहाँ गहरी तल्लीनता

3. कविता का भाव (विचारों के क्रम से, SOYL के शब्दों में)

(क) दो आवाज़ें. मुख्य गायक की आवाज़ दृढ़ और वज़नदार है, मानो कोई विशाल शिला; संगतकार की आवाज़ मधुर, पर कोमल और थरथराती।

(ख) संगतकार कौन. वह प्रायः गायक का शिष्य, कोई पारिवारिक सदस्य या सीखने को आतुर कोई संबंधी होता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है; उसका सुर गायक के सुर के पीछे परछाईं-सा चलता है।

(ग) भटकता गायक. जब गायक अंतरा गाते हुए तानों की उलझन में डूबकर राह भूल जाता है, या सुरों की सीमा पार कर किसी असीम आलाप में खो जाता है, ऐसे में संगतकार स्थायी थामे रहता है — मानो गायक की राह में बिखरी चीज़ें बटोर रहा हो, या उसे उसके सीखने वाले, शुरुआती दिनों का स्मरण करा रहा हो।

(घ) ऊँचे सुरों का संकट. तारसप्तक पर जब गायक की आवाज़ टूटने लगती है, प्रेरणा और जोश चुकने लगते हैं और आवाज़ बुझती-सी लगती है, ऐसे में संगतकार का सुर उसे हिम्मत बँधाता है। कभी बिना ज़रूरत भी वह सुर मिलाता है, ताकि गायक को लगे कि कोई उसके साथ है; उस सुर में नई शुरुआत की आशा भी है।

(ङ) झिझक का अर्थ. संगतकार के सुर में झिझक है और वह जान-बूझकर अपना सुर गायक से ऊपर नहीं ले जाता। कवि कहते हैं कि इसे असफलता नहीं, मनुष्यता समझना चाहिए।

यह SOYL का भावार्थ है, कविता का अनुवाद नहीं। मूल कविता अपनी पाठ्यपुस्तक में पढ़ें।

तालिका: प्रमुख गायक और संगतकार की तुलना — आवाज़, मंच पर स्थान, संबंध और भूमिका।
प्रमुख गायकसंगतकार
आवाज़ (SOYL के शब्दों में)शिला-सी दृढ़ और वज़नदारमधुर, पर कोमल और थरथराती
मंच पर स्थानकेंद्र में, नाम और तालियाँपीछे, प्रायः अनदेखा
संबंधगुरु या बड़ाशिष्य, कोई पारिवारिक सदस्य या सीखने को आतुर संबंधी
भूमिकागीत को ऊँचाई देनागीत को थामे रखना

4. संगतकार की भूमिका और मनुष्यता

भूमिकाएँ (हर एक के साथ कविता का प्रसंग):

  1. गीत को थामे रखना — भटके गायक के लिए स्थायी।
  2. राह की चीज़ें बटोरना — गायक जो पीछे छोड़ दे, उसे सँभालना।
  3. जड़ों से जोड़ना — शुरुआती, सीखने वाले दिनों का स्मरण।
  4. संकट में सहारा — ऊँचे सुरों पर हिम्मत बँधाना।
  5. साथ का भरोसा — गायक एकाकी नहीं।
  6. आशा — राग को नए सिरे से साधना संभव है।

मनुष्यता: प्रतिभा होते हुए भी अपना सुर ऊपर न ले जाना त्याग और संयम है। सामान्य दृष्टि इसे कमज़ोरी समझ सकती है; कवि की दृष्टि में यह बड़प्पन है।

5. प्रतीक: जीवन के संगतकार

संगतकार एक प्रतीक है — हर उस व्यक्ति का, जो किसी की सफलता के पीछे चुपचाप खड़ा रहता है:

  • फ़िल्म: लेखक, कैमरा और रोशनी वाले, खतरनाक दृश्य करने वाले;
  • अस्पताल: सहायक डॉक्टर और नर्सें;
  • खेल: दूसरे छोर पर टिका साथी, कोच, फ़िज़ियोथेरेपिस्ट;
  • विज्ञान: मिशन के पीछे हज़ारों वैज्ञानिक और तकनीशियन;
  • घर: अपनी इच्छाएँ पीछे रखकर दूसरों को आगे बढ़ाने वाले माता-पिता, भाई-बहन।

कविता की माँग: ऐसे लोगों को पहचानने और उन्हें श्रेय देने की नई, संवेदनशील दृष्टि।

तालिका: जीवन के पाँच क्षेत्रों में प्रमुख व्यक्ति और उनके संगतकार — फ़िल्म, अस्पताल, खेल, विज्ञान और घर।
क्षेत्रप्रमुख व्यक्तिसंगतकार
फ़िल्मनायक-नायिकालेखक, कैमरा और रोशनी वाले, खतरनाक दृश्य करने वाले
अस्पतालप्रमुख शल्य-चिकित्सकसहायक डॉक्टर, नर्सें
खेलशतक बनाने या गोल करने वालादूसरे छोर का साथी, कोच, फ़िज़ियोथेरेपिस्ट
विज्ञानमिशन का चेहराहज़ारों वैज्ञानिक और तकनीशियन
घरआगे बढ़ता सदस्यअपनी इच्छाएँ पीछे रखने वाले माता-पिता, भाई-बहन

6. काव्य-सौंदर्य और अलंकार (SOYL की उदाहरण-पंक्तियों से)

उदाहरण-पंक्तियाँ SOYL की रची हैं; कविता में प्रयोग का केवल वर्णन दिया गया है।

  • छंद: मुक्त छंद; तुक और मात्रा का बंधन नहीं।
  • भाषा: सरल, साफ़ खड़ी बोली; स्थायी, अंतरा, तान, सरगम, तारसप्तक, अनहद जैसे संगीत के पारिभाषिक शब्द।
  • प्रतीक: संगतकार = अनदेखा सहयोगी।
  • बिंब: दृश्य (शिला-सी आवाज़, राख-सी बुझती आवाज़) और श्रव्य (थरथराता सुर, टूटती आवाज़)।
  • उपमा — "तबले-सी गूँजती हँसी" (SOYL)। कविता में: गायक के सुर की चट्टान से तुलना।
  • रूपक — "सुरों के सागर में डूबा मन" (SOYL)। कविता में: तानों को ही घना वन मान लेना।
  • मानवीकरण — "थकी बाँसुरी ने रुककर साँस ली" (SOYL)।
  • श्रव्य बिंब — "घुँघरू की खनक से जागा आँगन" (SOYL)।

स्वर: संवेदना, सम्मान और विनम्रता।

उदाहरण-पंक्तियाँ SOYL ने रची हैं; ये मंगलेश डबराल की पंक्तियाँ नहीं हैं।
अलंकारपहचानSOYL की उदाहरण-पंक्तिकविता में (वर्णन)
उपमासा, सी, जैसे से समानतातबले-सी गूँजती हँसीप्रमुख गायक के सुर की चट्टान से तुलना
रूपकउपमेय और उपमान में अभेदसुरों के सागर में डूबा मनतानों को ही घना वन मान लेना
मानवीकरणजड़ वस्तु में मनुष्य जैसी क्रियाथकी बाँसुरी ने रुककर साँस लीप्रेरणा का चुक जाना, जोश का डूबना
श्रव्य बिंबध्वनि का अनुभव कराने वाला चित्रघुँघरू की खनक से जागा आँगनथरथराता सुर, टूटती आवाज़
तालिका: काव्य-सौंदर्य के छह पक्ष — मुक्त छंद, सरल भाषा और संगीत-शब्दावली, प्रतीक, बिंब, अलंकार और संवेदना का स्वर।
पक्षविशेषता
छंदमुक्त छंद; लय विचार के साथ
भाषासरल, साफ़ खड़ी बोली; संगीत के पारिभाषिक शब्द
प्रतीकसंगतकार = हर क्षेत्र का अनदेखा सहयोगी
बिंबशिला-सी आवाज़, तानों की उलझन, राख-सी बुझती आवाज़ (दृश्य और श्रव्य)
अलंकारउपमा (सुर की चट्टान से तुलना), रूपक का भाव (तानों का घना विस्तार)
स्वरसंवेदना, सम्मान, विनम्रता

7. परीक्षा में पठित काव्यांश और शब्दार्थ

बोर्ड परीक्षा में पाठ्यपुस्तक से एक काव्यांश देकर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जाते हैं। SOYL अपनी सामग्री में कविता की पंक्तियाँ नहीं छापता; अभ्यास के लिए SOYL की टिप्पणियाँ (कविता के किसी विचार की व्याख्या) दी गई हैं, जिन पर वैसे ही प्रश्न हैं।

असली तैयारी: क्षितिज भाग 2 में कविता कई बार पढ़िए; हर प्रसंग में संगतकार की भूमिका पहचानिए; संगीत के शब्दों के अर्थ और संगतकार का प्रतीकार्थ याद कीजिए।

केवल एक-एक शब्द दिया गया है; पंक्तियाँ अपनी पाठ्यपुस्तक में पढ़ें।
शब्दअर्थ
संगतकारमुख्य कलाकार का सहयोगी कलाकार
स्थायीगीत की टेक
अंतरास्थायी के बाद के चरण
तानसुरों का विस्तार
सरगमसुरों का क्रम
तारसप्तकऊँचे सुरों का सप्तक
अनहदअसीम नाद
नौसिखियाजिसने अभी-अभी सीखना शुरू किया हो

मुख्य शब्द

स्थायी

गीत की टेक

अंतरा

स्थायी के बाद के चरण

तान

सुरों का विस्तार

सरगम

सुरों का क्रम

तारसप्तक

ऊँचे सुरों का सप्तक

अनहद

असीम नाद

नौसिखिया

नया सीखने वाला

परीक्षा सुझाव

खंड ग, क्षितिज काव्य — 11 अंक: पठित काव्यांश पर 5 बहुविकल्पी प्रश्न (5 × 1) और काव्य पाठों पर 4 में से 3 प्रश्न (25–30 शब्द, 3 × 2)।

अंक कैसे मिलते हैं (2 अंक): भूमिका या भाव (1) + कविता का प्रसंग, अपने शब्दों में (1)।

आम गलतियाँ

  1. संगतकार को कमज़ोर या असफल कलाकार लिखना — कवि उसकी झिझक को मनुष्यता मानते हैं।
  2. कविता को केवल संगीत की कविता मानना — संगतकार हर क्षेत्र के अनदेखे सहयोगी का प्रतीक है।
  3. स्थायी और अंतरा का अर्थ उलट देना — स्थायी टेक है, अंतरा उसके बाद के चरण।
  4. कविता को तुकांत बताना — यह मुक्त छंद में है।
  5. तारसप्तक को नीचे के सुर लिखना — वह सबसे ऊँचे सुरों का सप्तक है।
  6. पंक्तियाँ रटकर गलत उद्धृत करना — प्रसंग और उसका अर्थ अपने शब्दों में लिखना पर्याप्त है।