1. लेखिका-परिचय: मधु कांकरिया
ध्यान दें: मूल पाठ अपनी पाठ्यपुस्तक कृतिका भाग 2 (NCERT) में अवश्य पढ़ें। यहाँ केवल SOYL की व्याख्या है, पाठ नहीं।
मधु कांकरिया (जन्म 1957) कोलकाता की हैं। वे हिंदी की कथाकार हैं, जिनकी रचनाओं में समाज की कड़वी सच्चाइयाँ संवेदना के साथ आती हैं।
- उपन्यास: खुले गगन के लाल सितारे, सलाम आख़िरी, पत्ताखोर, सेज पर संस्कृत;
- कहानी-संग्रह: बीतते हुए, और अंत में ईशु;
- यह पाठ: उनकी सिक्किम-यात्रा का वृत्तांत।
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| जन्म | सन् 1957, कोलकाता |
| पहचान | कथाकार; उपन्यास, कहानियाँ और यात्रा-वृत्तांत |
| उपन्यास | खुले गगन के लाल सितारे, सलाम आख़िरी, पत्ताखोर, सेज पर संस्कृत |
| कहानी-संग्रह | बीतते हुए, और अंत में ईशु |
| यह पाठ | सिक्किम-यात्रा का वृत्तांत |
मुख्य शब्द
- यात्रा-वृत्तांत
किसी यात्रा के स्थानों, लोगों और अनुभवों का लेखक द्वारा क्रम से किया गया वर्णन।
2. विधा और प्रसंग
साना-साना हाथ जोड़ि कृतिका भाग 2 का पाठ और एक यात्रा-वृत्तांत है। लेखिका सिक्किम की राजधानी गंतोक (आज का प्रचलित नाम गंगटोक) से यूमथांग की घाटी की ओर यात्रा करती है। रास्ते के मुख्य पड़ाव: गंतोक → पताकाओं वाला रास्ता → कवी-लोंग स्टॉक → लायुंग → कटाओ।
पाठ में तीन धाराएँ साथ बहती हैं: प्रकृति का सौंदर्य, पहाड़ी लोगों का कठिन श्रम और आस्था, और प्रकृति-संरक्षण की चिंता।
बोर्ड में: कृतिका से 8 अंक — तीन में से दो प्रश्न, 50–60 शब्द, 4-4 अंक।
दूरी, ऊँचाई और ऐसे अंक अपनी पाठ्यपुस्तक से ही लें।
3. पाठ का सार (पड़ाव के क्रम से, SOYL के शब्दों में)
(क) गंतोक की रात. तारों भरा आसमान लेखिका को मुग्ध कर देता है; वह एक नेपाली युवती की सिखाई प्रार्थना गुनगुनाती है, जिसके शुरुआती शब्द शीर्षक बने। गंतोक उसे परिश्रमी आम लोगों का शहर लगता है।
(ख) सुबह और रास्ता. सुबह बादलों के कारण बर्फ़ीली चोटी नहीं दिखती, पर रास्ते में फूल दिखते हैं। गाइड जितेन नार्गे के साथ यूमथांग की ओर यात्रा शुरू होती है।
(ग) पताकाएँ. सफ़ेद पताकाएँ किसी बौद्ध की मृत्यु पर शांति-कामना के लिए, रंगीन पताकाएँ नई शुरुआत पर।
(घ) धर्म-चक्र. कवी-लोंग स्टॉक में घूमता प्रार्थना-चक्र; उसे घुमाने से पाप दूर होने की मान्यता लेखिका को देश भर की एक जैसी आस्था का अनुभव कराती है।
(ङ) श्रम. पत्थर तोड़ती पहाड़ी स्त्रियाँ, जिनकी पीठ पर बच्चे बँधे हैं; लंबी चढ़ाई से स्कूल जाते और घर के काम करते बच्चे। इनके श्रम का लाभ सबको, पर इनके हिस्से बहुत कम।
(च) झरना. सेवन सिस्टर्स झरने के पास लेखिका को मन की शुद्धि का अनुभव।
(छ) लायुंग और कटाओ. लायुंग में प्रदूषण से घटती बर्फ़ की बात; दुकानों से मुक्त, बर्फ़ से ढका, साफ़ कटाओ।
(ज) जल और सैनिक. प्रकृति सर्दियों में बर्फ़ जमा कर गर्मियों में पानी देती है; सीमा पर कड़ी ठंड में चौकसी करते सैनिकों के प्रति कृतज्ञता।
यह SOYL का सार है, पाठ का अंश नहीं। मूल पाठ अपनी पाठ्यपुस्तक में पढ़ें।
| दृश्य (SOYL के शब्दों में) | लेखिका पर प्रभाव |
|---|---|
| गंतोक का तारों भरा आसमान | मुग्धता, सब भूल जाना |
| बादलों में छिपी चोटियाँ, रास्ते के फूल | उत्सुकता और आनंद |
| सेवन सिस्टर्स झरना | मन की शुद्धि का अनुभव |
| कटाओ की चारों ओर फैली बर्फ़ | बच्चों जैसा उल्लास |
4. मूल भाव और संदेश: सौंदर्य, आस्था और श्रम
- सौंदर्य और संवेदना साथ-साथ: लेखिका प्रकृति में डूबकर भी मनुष्य के दुख से आँखें नहीं मूँदती।
- श्रम का सम्मान: जिन रास्तों पर सैलानी घूमते हैं, वे पत्थर तोड़ती स्त्रियों के पसीने से बने हैं; उनके श्रम का लाभ सबको मिलता है, पर उनके हिस्से बहुत कम आता है।
- सांस्कृतिक एकता: धर्म-चक्र के प्रसंग से लेखिका भारत की आस्थाओं की भीतरी एकता देखती है।
- कृतज्ञता: प्रकृति (जल-व्यवस्था) और सैनिक (सीमा की रक्षा) — दोनों बिना माँगे हमारी रक्षा करते हैं।
- शीर्षक: नेपाली प्रार्थना का विनम्र, कृतज्ञ भाव पूरे पाठ में फैला है।
जितेन नार्गे: जानकार, संवेदनशील, पर्यावरण-सजग और कुशल चालक — एक अच्छे गाइड का उदाहरण।
| जितेन नार्गे का गुण | प्रसंग |
|---|---|
| जानकार | पताकाओं और धर्म-चक्र का अर्थ समझाना |
| संवेदनशील | श्रमिकों और बच्चों के कठिन जीवन की बात |
| पर्यावरण-सजग | कटाओ के साफ़ रहने का कारण बताना |
| कुशल चालक | कठिन पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षित यात्रा |
मुख्य शब्द
- संवेदना
दूसरों के सुख-दुख को अपने मन में अनुभव करने की क्षमता।
5. पर्यावरण-चेतना
- चेतावनी (लायुंग): एक स्थानीय युवक के अनुसार प्रदूषण से बर्फ़बारी हर साल घट रही है।
- आशा (कटाओ): दुकानें नहीं, इसलिए भीड़, कूड़ा और शोर नहीं; संयम से सौंदर्य सुरक्षित।
- प्रकृति की जल-व्यवस्था: ठंड में पहाड़ों पर बर्फ़ का भंडार, गर्मी में उसका पिघलकर नदियों से मैदानों तक पहुँचना — इसलिए हिमालय की बर्फ़ मैदानों के जीवन का आधार है।
- हमारी भूमिका: प्लास्टिक कम करना, यात्रा में अपना कचरा वापस लाना, पेड़ लगाना, ऊर्जा और पानी बचाना, संयमित पर्यटन का समर्थन करना और दूसरों को जागरूक करना।
| स्थान | स्थिति | संदेश |
|---|---|---|
| लायुंग | बर्फ़ लगभग नहीं; प्रदूषण से बर्फ़बारी घटी | चेतावनी |
| कटाओ | बर्फ़ से ढका; दुकानें नहीं, इसलिए साफ़ | संयम से संरक्षण |
मुख्य शब्द
- प्रदूषण
हवा, पानी या मिट्टी में हानिकारक तत्वों का मिल जाना।
- संयमित पर्यटन
ऐसा पर्यटन जिसमें यात्रियों की संख्या और व्यवहार प्रकृति की सीमा में रहें।
6. भाषा-शैली
- यात्रा-वृत्तांत: स्थान, लोग और अनुभव क्रम से।
- आत्मकथात्मक शैली: लेखिका "मैं" कहकर अपनी अनुभूतियाँ बताती है।
- चित्रात्मकता: तारे, झरने और बर्फ़ के दृश्य आँखों के सामने खिंच जाते हैं।
- काव्यात्मकता: भावुक क्षणों में भाषा लयपूर्ण हो जाती है।
- मिली-जुली शब्दावली: नेपाली प्रार्थना, अंग्रेज़ी के प्रचलित शब्द (प्रेयर व्हील, स्नोफ़ॉल) और सहज हिंदी।
- विरोध की शैली: सौंदर्य के दृश्य के तुरंत बाद संघर्ष का दृश्य — पाठक को सोचने पर विवश करता है।
| विशेषता | उदाहरण (SOYL के शब्दों में) |
|---|---|
| यात्रा-वृत्तांत | स्थान, लोग और अनुभव क्रम से |
| आत्मकथात्मक शैली | लेखिका "मैं" कहकर अपनी अनुभूतियाँ बताती है |
| चित्रात्मकता | तारे, झरना, बर्फ़ — दृश्य आँखों के सामने |
| काव्यात्मकता | भावुक क्षणों में भाषा लयपूर्ण हो जाती है |
| मिली-जुली शब्दावली | नेपाली (साना), अंग्रेज़ी (प्रेयर व्हील, स्नोफ़ॉल) के साथ सहज हिंदी |
7. कृतिका के प्रश्न और शब्दार्थ
कृतिका से बोर्ड में तीन में से दो प्रश्न आते हैं, हर एक 4 अंक का, 50–60 शब्दों में। SOYL अपनी सामग्री में पाठ के अंश नहीं छापता; अभ्यास के लिए SOYL की टिप्पणियाँ (किसी प्रसंग की व्याख्या) दी गई हैं, जिन पर बहुविकल्पी प्रश्न हैं, और पचास-साठ शब्दों वाले प्रश्नों का अलग अभ्यास है।
उत्तर का ढाँचा (4 अंक): प्रसंग → लेखिका की अनुभूति या विचार → पाठ का प्रमाण → अपना निष्कर्ष।
असली तैयारी: कृतिका भाग 2 में पूरा पाठ पढ़िए; पड़ावों का क्रम याद रखिए; सौंदर्य और संघर्ष के दृश्यों की दो सूचियाँ बनाइए; और नीचे दिए शब्दों के अर्थ समझिए।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| साना-साना | छोटे-छोटे (नेपाली) |
| पताका | झंडा, ध्वज |
| सम्मोहित | मुग्ध, मोहित |
| धर्म-चक्र | प्रार्थना-चक्र, जिसे घुमाया जाता है |
| जिजीविषा | जीने की प्रबल इच्छा |
| छावनी | सेना के ठहरने का स्थान |
| संयम | अपने ऊपर नियंत्रण, मर्यादा |
मुख्य शब्द
- साना-साना
छोटे-छोटे
- पताका
झंडा
- सम्मोहित
मुग्ध
- धर्म-चक्र
प्रार्थना-चक्र
- जिजीविषा
जीने की प्रबल इच्छा
- छावनी
सेना के ठहरने का स्थान
- संयम
अपने ऊपर नियंत्रण
परीक्षा सुझाव
खंड ग, कृतिका भाग 2 — 8 अंक: तीन में से दो प्रश्न, 50–60 शब्द, 4-4 अंक।
अंक कैसे मिलते हैं (4 अंक): प्रसंग (1) + लेखिका की अनुभूति या विचार (1) + पाठ का प्रमाण (1) + निष्कर्ष और भाषा (1)।
आम गलतियाँ
- सफ़ेद और रंगीन पताकाओं के अवसर उलट देना — सफ़ेद शोक की, रंगीन नई शुरुआत की।
- यह लिखना कि लायुंग में ख़ूब बर्फ़ थी — बर्फ़ कटाओ में मिली।
- कटाओ को बाज़ार वाला बताना — उसकी ताज़गी का कारण ही दुकानों का न होना है।
- दूरी, ऊँचाई या पताकाओं की संख्या अपने अनुमान से लिखना — अंक पाठ्यपुस्तक से ही लें।
- केवल सौंदर्य लिखना और श्रमिकों या सैनिकों वाला पक्ष छोड़ देना।
- नेपाली प्रार्थना या पाठ के वाक्य रटकर लिखना — भाव अपने शब्दों में लिखें।