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मैं क्यों लिखता हूँ? — अज्ञेय: नोट्स

7 sections 7 min readBeta

1. लेखक-परिचय: अज्ञेय

ध्यान दें: मूल निबंध अपनी पाठ्यपुस्तक कृतिका भाग 2 (NCERT) में अवश्य पढ़ें। यहाँ केवल SOYL की व्याख्या है, पाठ नहीं।

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय" (1911–1987) कुशीनगर (कसया), उत्तर प्रदेश में जन्मे। युवावस्था में क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। आगे चलकर वे कवि, कथाकार, यात्री और संपादक के रूप में प्रसिद्ध हुए। सन् 1943 में तार सप्तक के संपादन से वे हिंदी कविता में प्रयोगवाद के प्रवर्तक माने गए।

  • कविता: हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी, आँगन के पार द्वार, कितनी नावों में कितनी बार (ज्ञानपीठ पुरस्कार);
  • उपन्यास: शेखर: एक जीवनी, नदी के द्वीप, अपने-अपने अजनबी;
  • यात्रा-वृत्तांत: अरे यायावर रहेगा याद, एक बूँद सहसा उछली।
तालिका: अज्ञेय — पूरा नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन, जीवन-काल उन्नीस सौ ग्यारह से उन्नीस सौ सत्तासी, जन्म कुशीनगर में, तार सप्तक से प्रयोगवाद के प्रवर्तक, प्रमुख कविता-संग्रह, उपन्यास और यात्रा-वृत्तांत।
बिंदुजानकारी
पूरा नामसच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय"
जीवन-कालसन् 1911 – 1987
जन्म-स्थानकुशीनगर (कसया), उत्तर प्रदेश
पहचानकवि, कथाकार, यात्री, संपादक; तार सप्तक (1943) से प्रयोगवाद के प्रवर्तक
कविताहरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी, कितनी नावों में कितनी बार (ज्ञानपीठ)
गद्यशेखर: एक जीवनी, नदी के द्वीप, अपने-अपने अजनबी; अरे यायावर रहेगा याद

मुख्य शब्द

प्रयोगवाद

हिंदी कविता की वह धारा जिसमें विषय, भाषा और शिल्प में नए प्रयोग किए गए; तार सप्तक से इसका आरंभ माना जाता है।

2. विधा और प्रसंग

मैं क्यों लिखता हूँ? कृतिका भाग 2 का पाठ और एक आत्मपरक निबंध है। लेखक "मैं" कहकर अपने ही लेखन की प्रेरणा की पड़ताल करते हैं।

निबंध तीन बड़े प्रश्नों से गुज़रता है: लेखक क्यों लिखता है? बाहरी दबाव और भीतर की विवशता में क्या अंतर है? और अनुभव तथा अनुभूति में क्या अंतर है? इन प्रश्नों को स्पष्ट करने के लिए लेखक हिरोशिमा पर परमाणु बम की त्रासदी से जुड़े अपने अनुभव का उदाहरण देते हैं।

बोर्ड में: कृतिका से 8 अंक — तीन में से दो प्रश्न, 50–60 शब्द, 4-4 अंक।

तालिका: लिखने के दो कारण — बाहरी दबाव, जो संपादक, प्रकाशक या पैसे से आता है और लिखना शुरू करवा सकता है; और आंतरिक विवशता, जो भीतर की बेचैनी है और रचना में प्राण डालती है।
बाहरी दबावआंतरिक विवशता
कहाँ सेसंपादक का आग्रह, प्रकाशक का तकाज़ा, पैसों की ज़रूरतभीतर उठी बेचैनी
भूमिकाआलस्य तोड़कर लिखना शुरू करवा सकता हैरचना में प्राण डालती है
लेखक का मतकुछ सीमा तक मददगारसच्चे लेखन का असली स्रोत

3. निबंध का सार (विचारों के क्रम से, SOYL के शब्दों में)

(क) प्रश्न और पहला उत्तर. लेखक क्यों लिखता है — यह प्रश्न सरल दिखता है, पर उत्तर मन की गहरी परतों में है। अज्ञेय लिखकर ही समझ पाते हैं कि उन्हें लिखने की ज़रूरत क्यों पड़ी, और लिखने के बाद भीतर के दबाव से हल्के हो जाते हैं।

(ख) दो प्रकार के कारण. कुछ रचनाकार इसलिए भी लिखते हैं कि संपादक का आग्रह है, प्रकाशक की माँग है या पैसों की ज़रूरत है। ये बाहरी दबाव कभी-कभी आलस्य तोड़ने में सहायक हैं, पर सच्ची रचना भीतर की विवशता से जन्मती है।

(ग) अनुभव और अनुभूति. अनुभव वह है जो सामने घटा; अनुभूति किसी सच को भीतर इतना महसूस करना है कि वह अपना हो जाए। रचनाकार के लिए अनुभूति अधिक महत्त्वपूर्ण है।

(घ) हिरोशिमा: जानकारी और अनुभव. विज्ञान के विद्यार्थी के रूप में लेखक को परमाणु की किताबी जानकारी थी; बम गिरने की ख़बरें पढ़कर उन्होंने बुद्धि से विरोध किया। जापान जाकर विकिरण-पीड़ितों का अस्पताल भी देखा। फिर भी रचना नहीं हुई।

(ङ) पत्थर की छाप: अनुभूति. एक सड़क पर एक पत्थर पर मनुष्य की छाया-सी छाप देखी — विस्फोट में मिटे व्यक्ति का प्रमाण। उस क्षण घटना उनके भीतर जीवित हो उठी, मानो उन्होंने स्वयं उसे झेला हो।

(च) कविता. भारत लौटने के कुछ समय बाद, एक रेल-यात्रा में, उन्होंने हिरोशिमा नाम की कविता लिखी। उनके लिए महत्त्वपूर्ण यह है कि उसकी जड़ें अनुभूति में हैं, इसलिए वह सच्ची है।

यह SOYL का सार है, निबंध का अंश नहीं। मूल पाठ अपनी पाठ्यपुस्तक में पढ़ें।

4. अनुभव, अनुभूति और आंतरिक विवशता

शब्दअर्थ (SOYL के शब्दों में)निबंध में
अनुभवजो सामने घटा, देखा या झेलाहिरोशिमा का अस्पताल देखना
अनुभूतिकिसी सच को भीतर इतना महसूस करना कि वह अपना हो जाएपत्थर की छाप देखकर त्रासदी को अपना मान लेना
बाहरी दबावबाहर से आया आग्रह — संपादक, प्रकाशक, पैसाकुछ सीमा तक मददगार
आंतरिक विवशताभीतर उठी बेचैनी, जिससे सच्ची रचना जन्मती हैछाप देखने के बाद जागी

छाप कैसे बनी: विस्फोट के क्षण वहाँ मौजूद व्यक्ति के शरीर ने घातक किरणें रोक लीं; वह मिट गया, आसपास का पत्थर झुलस गया, और जहाँ वह था वहाँ उसकी आकृति जैसी छाप बच गई।

तालिका: अनुभव और अनुभूति का अंतर — अनुभव प्रत्यक्ष देखा-झेला, जैसे अस्पताल; अनुभूति भीतर तक उतरा सच, जैसे पत्थर की छाप देखकर त्रासदी को अपना मान लेना; सच्ची रचना अनुभूति से।
अनुभवअनुभूति
अर्थ (SOYL के शब्दों में)जो सामने घटा, देखा या झेलाकिसी सच को भीतर इतना महसूस करना कि वह अपना हो जाए
आधारप्रत्यक्षसंवेदनशीलता और कल्पना-शक्ति
निबंध में उदाहरणहिरोशिमा का अस्पताल देखनापत्थर पर मनुष्य की छाप देखकर त्रासदी को अपना मान लेना
रचना के लिएज़रूरी, पर पर्याप्त नहींसच्ची रचना का स्रोत

मुख्य शब्द

अनुभव

प्रत्यक्ष देखा-झेला सच।

अनुभूति

संवेदनशीलता और कल्पना-शक्ति से भीतर तक महसूस किया गया सच।

आंतरिक विवशता

भीतर से उठी वह बेचैनी जो लिखने को विवश करती है।

5. मूल भाव और संदेश

  • सच्चा लेखन भीतर से: बाहरी दबाव शुरुआत करा सकते हैं, पर रचना में प्राण आंतरिक विवशता डालती है।
  • अनुभूति अनुभव से बड़ी: देखना काफ़ी नहीं; सच को भीतर तक महसूस करना ज़रूरी है।
  • सच्चाई की कसौटी: रचना अच्छी-बुरी से पहले सच्ची होनी चाहिए।
  • विज्ञान पर चेतावनी: हिरोशिमा बताता है कि मनुष्य की बड़ी खोज भी विनाश के हाथ में त्रासदी बन जाती है।
  • आज के लिए संदेश: कुछ भी लिखने से पहले विषय को भीतर से महसूस करें; तकनीक का प्रयोग जोड़ने में करें, तोड़ने में नहीं।
तालिका: विज्ञान के दो चेहरे — परमाणु ऊर्जा, ड्रोन और इंटरनेट, हर एक का कल्याणकारी और विनाशकारी प्रयोग।
विज्ञानकल्याण में प्रयोगविनाश में प्रयोग
परमाणु ऊर्जाबिजली, चिकित्साहिरोशिमा जैसा बम
ड्रोनदवाइयाँ और राहत पहुँचानानिर्दोषों पर हमला
इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिपढ़ाई, इलाज, जानकारीनकली वीडियो, धोखा, नफ़रत

6. भाषा-शैली

  • आत्मपरक शैली: लेखक "मैं" कहकर अपने लेखन का रहस्य खोलते हैं।
  • विचारात्मकता: अनुभव और अनुभूति, बाहरी दबाव और आंतरिक विवशता के बारीक भेद।
  • उदाहरण-शैली: हिरोशिमा का पूरा प्रसंग एक विचार को समझाने के लिए आता है।
  • प्रश्न से आरंभ: शीर्षक और पहला वाक्य ही एक प्रश्न है, जो पाठक को साथ ले चलता है।
  • तत्सम-प्रधान, गंभीर भाषा: विवशता, अनुभूति, संवेदना, कृतिकार; कुछ अंग्रेज़ी शब्द भी सहज रूप से।
  • बिंब-प्रधान प्रसंग: पत्थर पर छाप का दृश्य पूरे निबंध का केंद्रीय बिंब है।
तालिका: भाषा-शैली की पाँच विशेषताएँ — आत्मपरक शैली, विचारात्मकता, उदाहरण-शैली, प्रश्न से आरंभ और तत्सम-प्रधान गंभीर भाषा।
विशेषताउदाहरण (SOYL के शब्दों में)
आत्मपरक शैलीलेखक "मैं" कहकर अपने लेखन का रहस्य खोलते हैं
विचारात्मकताअनुभव और अनुभूति का बारीक भेद
उदाहरण-शैलीहिरोशिमा का पूरा प्रसंग एक विचार को समझाने के लिए
प्रश्न से आरंभशीर्षक और पहला वाक्य ही एक प्रश्न
तत्सम-प्रधान, गंभीर भाषाविवशता, अनुभूति, संवेदना, कृतिकार

7. कृतिका के प्रश्न और शब्दार्थ

कृतिका से बोर्ड में तीन में से दो प्रश्न आते हैं, हर एक 4 अंक का, 50–60 शब्दों में। SOYL अपनी सामग्री में पाठ के अंश नहीं छापता; अभ्यास के लिए SOYL की टिप्पणियाँ (निबंध के किसी विचार की व्याख्या) दी गई हैं, जिन पर बहुविकल्पी प्रश्न हैं, और पचास-साठ शब्दों वाले प्रश्नों का अलग अभ्यास है।

उत्तर का ढाँचा (4 अंक): विचार → निबंध का प्रसंग → अपना उदाहरण या मत → निष्कर्ष।

असली तैयारी: कृतिका भाग 2 में पूरा निबंध पढ़िए; चार मुख्य शब्दों के अर्थ पक्के कीजिए; हिरोशिमा के पाँच पड़ाव क्रम से याद रखिए; और नीचे दिए शब्दों के अर्थ समझिए।

केवल एक-एक शब्द दिया गया है; वाक्य अपनी पाठ्यपुस्तक में पढ़ें।
शब्दअर्थ
अनुभवजो सामने घटा, देखा या झेला
अनुभूतिकिसी सच को भीतर गहराई से महसूस करना
विवशतालाचारी; ऐसा दबाव जिससे बचा न जा सके
कृतिकाररचना करने वाला, रचनाकार
आग्रहज़ोर देकर किया गया अनुरोध
विकिरणरेडियोधर्मी पदार्थ से निकलने वाली घातक किरणें
त्रासदीभयानक दुखद घटना
भोक्ताभोगने या झेलने वाला

मुख्य शब्द

अनुभव

जो सामने घटा

अनुभूति

भीतर तक महसूस किया सच

विवशता

लाचारी

कृतिकार

रचनाकार

आग्रह

ज़ोर देकर किया अनुरोध

विकिरण

घातक किरणें

त्रासदी

भयानक दुखद घटना

भोक्ता

झेलने वाला

परीक्षा सुझाव

खंड ग, कृतिका भाग 2 — 8 अंक: तीन में से दो प्रश्न, 50–60 शब्द, 4-4 अंक।

अंक कैसे मिलते हैं (4 अंक): विचार (1) + निबंध का प्रसंग (1) + अपना उदाहरण या मत (1) + निष्कर्ष और भाषा (1)।

आम गलतियाँ

  1. अनुभव और अनुभूति को उलट देना — अस्पताल अनुभव था, पत्थर की छाप से अनुभूति जागी।
  2. यह लिखना कि कविता जापान में लिखी गई — वह भारत लौटकर, एक रेल-यात्रा में लिखी गई।
  3. बाहरी दबाव को लेखक का मुख्य कारण बताना — लेखक भीतर की विवशता को असली कारण मानते हैं।
  4. यह मानना कि लेखक बाहरी दबावों को पूरी तरह बुरा मानते हैं — वे उन्हें कुछ सीमा तक मददगार मानते हैं।
  5. केवल हिरोशिमा का वर्णन करना और लेखन वाला मुख्य प्रश्न छोड़ देना।
  6. निबंध के वाक्य या बिंब रटकर लिखना — विचार अपने शब्दों में लिखें।