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रचनात्मक लेखन — नोट्स

7 sections 5 min readBeta

1. खंड घ: प्रश्न, शब्द-सीमा और अंक-योजना

CBSE हिंदी (पाठ्यक्रम अ) के प्रश्न-पत्र में खंड घ — रचनात्मक लेखन 20 अंक का है: अनुच्छेद (लगभग 120 शब्द, 6 अंक, तीन विषयों में से एक), पत्र (लगभग 100 शब्द, 5 अंक), स्ववृत्त अथवा ई-मेल (लगभग 80 शब्द, 5 अंक) और विज्ञापन अथवा संदेश (लगभग 40 शब्द, 4 अंक)।

हर लेखन-रूप में प्रारूप/प्रस्तुति, विषय-वस्तु और भाषा के अलग अंक हैं। प्रारूप अभ्यास से पक्का होता है; विषय-वस्तु में ठोस, प्रासंगिक विवरण चाहिए। नीचे की अंक-योजना SOYL ने बोर्ड-शैली पर बनाई है।

स्रोत: CBSE 2026-27 पाठ्यक्रम, खंड घ (कुल 20 अंक)।
खंड घ: रचनात्मक लेखनशब्द-सीमाअंक
अनुच्छेद (तीन में से एक विषय, संकेत-बिंदु सहित)लगभग 1206
पत्र (दो में से एक)लगभग 1005
स्ववृत्त अथवा ई-मेललगभग 805
विज्ञापन अथवा संदेशलगभग 404
SOYL की अंक-योजना, CBSE अंक-योजना की शैली पर; 2026-27 की आधिकारिक अंक-योजना से मिलान करें।
लेखन-रूपअंक-योजना (SOYL, बोर्ड-शैली)
अनुच्छेद (6)आरंभ 1 · विषय-वस्तु 3 · समापन 1 · भाषा और प्रस्तुति 1
पत्र (5)आरंभ और अंत की औपचारिकताएँ 1 · विषय-वस्तु 3 · भाषा 1
ई-मेल (5)प्रारूप 1 · विषय-वस्तु 3 · भाषा 1
स्ववृत्त (5)प्रारूप 1 · विवरण 3 · भाषा और प्रस्तुति 1
विज्ञापन (4)प्रस्तुति 1 · विषय-वस्तु 2 · भाषा और नारा 1
संदेश (4)प्रारूप 1 · विषय-वस्तु 2 · भाषा 1

2. अनुच्छेद-लेखन

अनुच्छेद किसी विषय पर एक ही अनुच्छेद में लिखा सुसंबद्ध लेख है। संकेत-बिंदु विचारों का क्रम बताते हैं — उन्हें उपशीर्षक न बनाएँ।

ढाँचा: शीर्षक → आकर्षक आरंभ (दृश्य, प्रश्न, कथन) → संकेत-बिंदु 1, 2, 3 (हर एक पर दो-तीन वाक्य, उदाहरण सहित) → निष्कर्ष, सुझाव या संदेश।

भाषा: "इसके अतिरिक्त", "दूसरी ओर", "इसलिए", "अंततः" जैसे योजक; छोटे-बड़े वाक्यों का मेल; आँकड़े तभी जब निश्चित हों।

बचें: "मैं … पर अनुच्छेद लिख रहा हूँ" जैसा आरंभ; एक ही बिंदु पर सारे शब्द; अचानक अंत।

तीनों बिंदुओं को लगभग बराबर स्थान दें।

मुख्य शब्द

संकेत-बिंदु

प्रश्न में दिए गए वे बिंदु जिनके क्रम में अनुच्छेद लिखा जाता है।

योजक शब्द

वाक्यों और विचारों को जोड़ने वाले शब्द — इसलिए, इसके अतिरिक्त, फिर भी।

3. औपचारिक पत्र

सात अंग, इसी क्रम में: प्रेषक का पता (परीक्षा में "परीक्षा भवन") → दिनांक → "सेवा में" + प्राप्तकर्ता का पद और पता → विषय → संबोधन (महोदय/महोदया) → मुख्य भाग → समापन (धन्यवाद सहित, भवदीय/भवदीया, नाम — परीक्षा में "क ख ग")।

प्रधानाचार्य को पत्र: "सेवा में" से आरंभ; "सविनय निवेदन है कि…"; समापन "आपका आज्ञाकारी शिष्य / आपकी आज्ञाकारी शिष्या", नाम, कक्षा।

मुख्य भाग (तीन छोटे अनुच्छेद): (1) परिचय और समस्या/उद्देश्य, (2) विवरण — कारण, प्रभाव, ठोस तथ्य, (3) स्पष्ट निवेदन/सुझाव।

प्रकार: शिकायती, अनुरोध/प्रार्थना, संपादक के नाम (सार्वजनिक समस्या, "आपके समाचार-पत्र के माध्यम से…")।

अनौपचारिक पत्र (परिवार, मित्र) में विषय-पंक्ति नहीं होती; संबोधन और समापन संबंध के अनुसार ("प्रिय अनुज… तुम्हारा बड़ा भाई")।

प्रधानाचार्य को पत्र "सेवा में" से शुरू होता है और "आपका आज्ञाकारी शिष्य/आपकी आज्ञाकारी शिष्या" पर समाप्त।
क्रमअंगउदाहरण
1प्रेषक का पतापरीक्षा भवन, नई दिल्ली
2दिनांकदिनांक: 27 अक्टूबर 2026
3प्राप्तकर्तासेवा में, (पद), (कार्यालय), (नगर)
4विषयविषय: … के संबंध में / … हेतु
5संबोधनमहोदय / महोदया,
6मुख्य भागपरिचय → विवरण → निवेदन (तीन छोटे अनुच्छेद)
7समापनधन्यवाद सहित, भवदीय/भवदीया, क ख ग
तालिका: तीन प्रकार के औपचारिक पत्र — शिकायती, अनुरोध और संपादक के नाम — किसे लिखे जाते हैं और मुख्य भाग कैसे शुरू होता है।
पत्र का प्रकारकिसेमुख्य भाग की शुरुआत (उदाहरण)
शिकायती पत्रनगर निगम, बिजली/जल विभाग, पुलिसमैं आपका ध्यान … की गंभीर समस्या की ओर दिलाना चाहता/चाहती हूँ।
अनुरोध/प्रार्थना-पत्रप्रधानाचार्य, परिवहन निगमसविनय निवेदन है कि …
संपादक के नाम पत्रदैनिक समाचार-पत्र का संपादकआपके प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के माध्यम से …
तालिका: अनौपचारिक वाक्यांश और उनके औपचारिक रूप — संबोधन, समय-सूचना, निवेदन और समापन।
अनौपचारिक (न लिखें)औपचारिक (लिखें)
भाई साहब, सुनिए…महोदय,
बहुत दिन सेपिछले दो सप्ताह से
जल्दी कुछ करोशीघ्र उचित कार्रवाई करने की कृपा करें
आप लोग कुछ नहीं करतेआपसे विनम्र निवेदन है कि…
तुम्हाराभवदीय / भवदीया

मुख्य शब्द

भवदीय/भवदीया

औपचारिक पत्र का समापन-शब्द (पुरुष/स्त्री)।

सविनय निवेदन

प्रार्थना-पत्र के मुख्य भाग का मानक आरंभ।

4. स्ववृत्त

स्ववृत्त किसी पद के आवेदन के साथ भेजा जाने वाला संक्षिप्त, तथ्यात्मक परिचय है (लगभग 80 शब्द, 5 अंक)।

खंड: शीर्षक "स्ववृत्त" → व्यक्तिगत विवरण (नाम, माता/पिता का नाम, जन्मतिथि, पता, संपर्क) → शैक्षिक योग्यताएँ (परीक्षा, बोर्ड/संस्था, वर्ष, अंक/श्रेणी) → पद से जुड़ी अन्य योग्यताएँ, कौशल, अनुभव, उपलब्धियाँ → रुचियाँ, भाषा-ज्ञान → घोषणा, दिनांक, हस्ताक्षर।

कुंजी: पद पहचानकर वही योग्यताएँ प्रमुख करें जो उस काम आएँ। अप्रासंगिक बातें (मित्रों के नाम, प्रिय भोजन) न लिखें।

तालिका: स्ववृत्त के छह खंड — शीर्षक, व्यक्तिगत विवरण, शैक्षिक योग्यताएँ, अन्य योग्यताएँ, रुचियाँ और भाषा-ज्ञान, तथा घोषणा।
खंडक्या लिखें
शीर्षकस्ववृत्त
व्यक्तिगत विवरणनाम, माता/पिता का नाम, जन्मतिथि, पता, संपर्क
शैक्षिक योग्यताएँपरीक्षा, बोर्ड/संस्था, वर्ष, अंक या श्रेणी
अन्य योग्यताएँ / अनुभवपद से जुड़े प्रमाणपत्र, कौशल, कार्य-अनुभव
रुचियाँ, भाषा-ज्ञानसंक्षेप में
घोषणाविवरण सत्य होने की पुष्टि, दिनांक, हस्ताक्षर

मुख्य शब्द

घोषणा

स्ववृत्त के अंत में विवरण के सत्य होने की पुष्टि।

5. ई-मेल

प्रारूप: प्रेषक → प्रति → प्रतिलिपि (आवश्यक हो तो) → विषय → संबोधन → मुख्य भाग → समापन (धन्यवाद, भवदीय/भवदीया, नाम, आवश्यक हो तो पद)।

विशेषताएँ: पत्र से छोटा (लगभग 80 शब्द) और सीधा; विषय-पंक्ति अनिवार्य; भाषा उतनी ही शिष्ट जितनी पत्र में।

प्रतिलिपि: किसी अन्य व्यक्ति को केवल सूचना के लिए वही ई-मेल भेजना।

तालिका: ई-मेल का प्रारूप — प्रेषक, प्रति, प्रतिलिपि, विषय, संबोधन और मुख्य भाग, समापन।
खानाक्या लिखें
प्रेषकअपना ई-मेल पता
प्रतिमुख्य प्राप्तकर्ता का ई-मेल पता
प्रतिलिपिजिसे सूचना के लिए प्रति भेजनी हो (आवश्यक हो तो)
विषयसंक्षिप्त, स्पष्ट: कहाँ + क्या
संबोधन और मुख्य भागमहोदय/महोदया; परिचय, विवरण, निवेदन — संक्षेप में
समापनधन्यवाद, भवदीय, नाम (और पद)

मुख्य शब्द

प्रति

मुख्य प्राप्तकर्ता का ई-मेल पता।

प्रतिलिपि

सूचना के लिए प्रति पाने वाले का ई-मेल पता।

6. विज्ञापन

उद्देश्य: किसी वस्तु, सेवा या आयोजन की ओर ध्यान खींचना (लगभग 40 शब्द, 4 अंक)।

पाँच तत्व: नारा → नाम → तीन मुख्य विशेषताएँ (बिंदुओं में) → छूट/विशेष आकर्षण → संपर्क या स्थान (आयोजन में क्या, कब, कहाँ; सार्वजनिक सूचना में निवेदक)।

नारे की तकनीकें: तुक, दोहराव, आह्वान, विरोध। नारा पाँच-छह शब्दों में।

प्रस्तुति: बॉक्स, मोटे अक्षर, कम शब्द।

पूरा विज्ञापन एक बॉक्स में, लगभग 40 शब्द।
तालिका: नारा गढ़ने की चार तकनीकें — तुक, दोहराव, आह्वान और विरोध — SOYL के उदाहरणों के साथ।
तकनीकउदाहरण (SOYL)
तुकहर घर में दीया, हर मन में जिया
दोहरावपेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ
आह्वानआज बचाओ, कल पाओ
विरोधकम ख़र्च, ज़्यादा मज़ा

मुख्य शब्द

नारा

विज्ञापन का छोटा, लयात्मक, याद रह जाने वाला वाक्य।

7. संदेश

उद्देश्य: किसी अवसर पर शुभकामना, बधाई, सांत्वना या प्रेरणा देना (लगभग 40 शब्द, 4 अंक)।

प्रारूप: शीर्षक "संदेश" → दिनांक और समय → संबोधन (संबंध के अनुसार; सामूहिक संदेश में "प्रिय साथियो") → मुख्य भाग (अवसर + शुभकामना/बधाई + एक भाव या संकल्प) → प्रेषक (आवश्यक हो तो पद)।

भाषा: भावपूर्ण, संक्षिप्त; बड़ों के लिए आदरसूचक, छोटों के लिए स्नेहपूर्ण।

तालिका: संदेश के पाँच अंग — शीर्षक, दिनांक और समय, संबोधन, मुख्य भाग और प्रेषक।
अंगउदाहरण
शीर्षकसंदेश
दिनांक और समयदिनांक: 31 दिसंबर 2026 · समय: रात 9 बजे
संबोधनप्रिय मित्र / आदरणीय दादीजी / प्रिय साथियो
मुख्य भागअवसर + शुभकामना/बधाई + एक भाव या संकल्प
प्रेषकतुम्हारा मित्र, क ख ग

परीक्षा सुझाव

खंड घ — 20 अंक। हर रूप में प्रारूप के अंक अभ्यास से पक्के करें; विषय-वस्तु के लिए हर उत्तर से पहले एक मिनट योजना बनाएँ।

परीक्षा-परंपरा: नाम-पता न दिया हो तो "परीक्षा भवन" और "क ख ग" लिखें; प्रश्न में नाम दिया हो तो वही लिखें।

आम गलतियाँ

  1. अनुच्छेद को कई अनुच्छेदों में तोड़ना या संकेत-बिंदुओं को उपशीर्षक बनाना।
  2. औपचारिक पत्र में विषय-पंक्ति छोड़ना; "तुम्हारा" से समापन।
  3. संपादक के नाम पत्र में निजी समस्या लिखना।
  4. स्ववृत्त में घोषणा भूलना या अप्रासंगिक बातें भरना।
  5. ई-मेल में विषय-पंक्ति खाली छोड़ना।
  6. विज्ञापन में संपर्क/स्थान न देना या लंबे वाक्य लिखना।
  7. संदेश में दिनांक-समय या प्रेषक छोड़ना।
  8. शब्द-सीमा से बहुत लंबा लिखकर दूसरे प्रश्नों का समय गँवाना।