1. खंड घ: प्रश्न, शब्द-सीमा और अंक-योजना
CBSE हिंदी (पाठ्यक्रम अ) के प्रश्न-पत्र में खंड घ — रचनात्मक लेखन 20 अंक का है: अनुच्छेद (लगभग 120 शब्द, 6 अंक, तीन विषयों में से एक), पत्र (लगभग 100 शब्द, 5 अंक), स्ववृत्त अथवा ई-मेल (लगभग 80 शब्द, 5 अंक) और विज्ञापन अथवा संदेश (लगभग 40 शब्द, 4 अंक)।
हर लेखन-रूप में प्रारूप/प्रस्तुति, विषय-वस्तु और भाषा के अलग अंक हैं। प्रारूप अभ्यास से पक्का होता है; विषय-वस्तु में ठोस, प्रासंगिक विवरण चाहिए। नीचे की अंक-योजना SOYL ने बोर्ड-शैली पर बनाई है।
| खंड घ: रचनात्मक लेखन | शब्द-सीमा | अंक |
|---|---|---|
| अनुच्छेद (तीन में से एक विषय, संकेत-बिंदु सहित) | लगभग 120 | 6 |
| पत्र (दो में से एक) | लगभग 100 | 5 |
| स्ववृत्त अथवा ई-मेल | लगभग 80 | 5 |
| विज्ञापन अथवा संदेश | लगभग 40 | 4 |
| लेखन-रूप | अंक-योजना (SOYL, बोर्ड-शैली) |
|---|---|
| अनुच्छेद (6) | आरंभ 1 · विषय-वस्तु 3 · समापन 1 · भाषा और प्रस्तुति 1 |
| पत्र (5) | आरंभ और अंत की औपचारिकताएँ 1 · विषय-वस्तु 3 · भाषा 1 |
| ई-मेल (5) | प्रारूप 1 · विषय-वस्तु 3 · भाषा 1 |
| स्ववृत्त (5) | प्रारूप 1 · विवरण 3 · भाषा और प्रस्तुति 1 |
| विज्ञापन (4) | प्रस्तुति 1 · विषय-वस्तु 2 · भाषा और नारा 1 |
| संदेश (4) | प्रारूप 1 · विषय-वस्तु 2 · भाषा 1 |
2. अनुच्छेद-लेखन
अनुच्छेद किसी विषय पर एक ही अनुच्छेद में लिखा सुसंबद्ध लेख है। संकेत-बिंदु विचारों का क्रम बताते हैं — उन्हें उपशीर्षक न बनाएँ।
ढाँचा: शीर्षक → आकर्षक आरंभ (दृश्य, प्रश्न, कथन) → संकेत-बिंदु 1, 2, 3 (हर एक पर दो-तीन वाक्य, उदाहरण सहित) → निष्कर्ष, सुझाव या संदेश।
भाषा: "इसके अतिरिक्त", "दूसरी ओर", "इसलिए", "अंततः" जैसे योजक; छोटे-बड़े वाक्यों का मेल; आँकड़े तभी जब निश्चित हों।
बचें: "मैं … पर अनुच्छेद लिख रहा हूँ" जैसा आरंभ; एक ही बिंदु पर सारे शब्द; अचानक अंत।
मुख्य शब्द
- संकेत-बिंदु
प्रश्न में दिए गए वे बिंदु जिनके क्रम में अनुच्छेद लिखा जाता है।
- योजक शब्द
वाक्यों और विचारों को जोड़ने वाले शब्द — इसलिए, इसके अतिरिक्त, फिर भी।
3. औपचारिक पत्र
सात अंग, इसी क्रम में: प्रेषक का पता (परीक्षा में "परीक्षा भवन") → दिनांक → "सेवा में" + प्राप्तकर्ता का पद और पता → विषय → संबोधन (महोदय/महोदया) → मुख्य भाग → समापन (धन्यवाद सहित, भवदीय/भवदीया, नाम — परीक्षा में "क ख ग")।
प्रधानाचार्य को पत्र: "सेवा में" से आरंभ; "सविनय निवेदन है कि…"; समापन "आपका आज्ञाकारी शिष्य / आपकी आज्ञाकारी शिष्या", नाम, कक्षा।
मुख्य भाग (तीन छोटे अनुच्छेद): (1) परिचय और समस्या/उद्देश्य, (2) विवरण — कारण, प्रभाव, ठोस तथ्य, (3) स्पष्ट निवेदन/सुझाव।
प्रकार: शिकायती, अनुरोध/प्रार्थना, संपादक के नाम (सार्वजनिक समस्या, "आपके समाचार-पत्र के माध्यम से…")।
अनौपचारिक पत्र (परिवार, मित्र) में विषय-पंक्ति नहीं होती; संबोधन और समापन संबंध के अनुसार ("प्रिय अनुज… तुम्हारा बड़ा भाई")।
| क्रम | अंग | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1 | प्रेषक का पता | परीक्षा भवन, नई दिल्ली |
| 2 | दिनांक | दिनांक: 27 अक्टूबर 2026 |
| 3 | प्राप्तकर्ता | सेवा में, (पद), (कार्यालय), (नगर) |
| 4 | विषय | विषय: … के संबंध में / … हेतु |
| 5 | संबोधन | महोदय / महोदया, |
| 6 | मुख्य भाग | परिचय → विवरण → निवेदन (तीन छोटे अनुच्छेद) |
| 7 | समापन | धन्यवाद सहित, भवदीय/भवदीया, क ख ग |
| पत्र का प्रकार | किसे | मुख्य भाग की शुरुआत (उदाहरण) |
|---|---|---|
| शिकायती पत्र | नगर निगम, बिजली/जल विभाग, पुलिस | मैं आपका ध्यान … की गंभीर समस्या की ओर दिलाना चाहता/चाहती हूँ। |
| अनुरोध/प्रार्थना-पत्र | प्रधानाचार्य, परिवहन निगम | सविनय निवेदन है कि … |
| संपादक के नाम पत्र | दैनिक समाचार-पत्र का संपादक | आपके प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के माध्यम से … |
| अनौपचारिक (न लिखें) | औपचारिक (लिखें) |
|---|---|
| भाई साहब, सुनिए… | महोदय, |
| बहुत दिन से | पिछले दो सप्ताह से |
| जल्दी कुछ करो | शीघ्र उचित कार्रवाई करने की कृपा करें |
| आप लोग कुछ नहीं करते | आपसे विनम्र निवेदन है कि… |
| तुम्हारा | भवदीय / भवदीया |
मुख्य शब्द
- भवदीय/भवदीया
औपचारिक पत्र का समापन-शब्द (पुरुष/स्त्री)।
- सविनय निवेदन
प्रार्थना-पत्र के मुख्य भाग का मानक आरंभ।
4. स्ववृत्त
स्ववृत्त किसी पद के आवेदन के साथ भेजा जाने वाला संक्षिप्त, तथ्यात्मक परिचय है (लगभग 80 शब्द, 5 अंक)।
खंड: शीर्षक "स्ववृत्त" → व्यक्तिगत विवरण (नाम, माता/पिता का नाम, जन्मतिथि, पता, संपर्क) → शैक्षिक योग्यताएँ (परीक्षा, बोर्ड/संस्था, वर्ष, अंक/श्रेणी) → पद से जुड़ी अन्य योग्यताएँ, कौशल, अनुभव, उपलब्धियाँ → रुचियाँ, भाषा-ज्ञान → घोषणा, दिनांक, हस्ताक्षर।
कुंजी: पद पहचानकर वही योग्यताएँ प्रमुख करें जो उस काम आएँ। अप्रासंगिक बातें (मित्रों के नाम, प्रिय भोजन) न लिखें।
| खंड | क्या लिखें |
|---|---|
| शीर्षक | स्ववृत्त |
| व्यक्तिगत विवरण | नाम, माता/पिता का नाम, जन्मतिथि, पता, संपर्क |
| शैक्षिक योग्यताएँ | परीक्षा, बोर्ड/संस्था, वर्ष, अंक या श्रेणी |
| अन्य योग्यताएँ / अनुभव | पद से जुड़े प्रमाणपत्र, कौशल, कार्य-अनुभव |
| रुचियाँ, भाषा-ज्ञान | संक्षेप में |
| घोषणा | विवरण सत्य होने की पुष्टि, दिनांक, हस्ताक्षर |
मुख्य शब्द
- घोषणा
स्ववृत्त के अंत में विवरण के सत्य होने की पुष्टि।
5. ई-मेल
प्रारूप: प्रेषक → प्रति → प्रतिलिपि (आवश्यक हो तो) → विषय → संबोधन → मुख्य भाग → समापन (धन्यवाद, भवदीय/भवदीया, नाम, आवश्यक हो तो पद)।
विशेषताएँ: पत्र से छोटा (लगभग 80 शब्द) और सीधा; विषय-पंक्ति अनिवार्य; भाषा उतनी ही शिष्ट जितनी पत्र में।
प्रतिलिपि: किसी अन्य व्यक्ति को केवल सूचना के लिए वही ई-मेल भेजना।
| खाना | क्या लिखें |
|---|---|
| प्रेषक | अपना ई-मेल पता |
| प्रति | मुख्य प्राप्तकर्ता का ई-मेल पता |
| प्रतिलिपि | जिसे सूचना के लिए प्रति भेजनी हो (आवश्यक हो तो) |
| विषय | संक्षिप्त, स्पष्ट: कहाँ + क्या |
| संबोधन और मुख्य भाग | महोदय/महोदया; परिचय, विवरण, निवेदन — संक्षेप में |
| समापन | धन्यवाद, भवदीय, नाम (और पद) |
मुख्य शब्द
- प्रति
मुख्य प्राप्तकर्ता का ई-मेल पता।
- प्रतिलिपि
सूचना के लिए प्रति पाने वाले का ई-मेल पता।
6. विज्ञापन
उद्देश्य: किसी वस्तु, सेवा या आयोजन की ओर ध्यान खींचना (लगभग 40 शब्द, 4 अंक)।
पाँच तत्व: नारा → नाम → तीन मुख्य विशेषताएँ (बिंदुओं में) → छूट/विशेष आकर्षण → संपर्क या स्थान (आयोजन में क्या, कब, कहाँ; सार्वजनिक सूचना में निवेदक)।
नारे की तकनीकें: तुक, दोहराव, आह्वान, विरोध। नारा पाँच-छह शब्दों में।
प्रस्तुति: बॉक्स, मोटे अक्षर, कम शब्द।
| तकनीक | उदाहरण (SOYL) |
|---|---|
| तुक | हर घर में दीया, हर मन में जिया |
| दोहराव | पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ |
| आह्वान | आज बचाओ, कल पाओ |
| विरोध | कम ख़र्च, ज़्यादा मज़ा |
मुख्य शब्द
- नारा
विज्ञापन का छोटा, लयात्मक, याद रह जाने वाला वाक्य।
7. संदेश
उद्देश्य: किसी अवसर पर शुभकामना, बधाई, सांत्वना या प्रेरणा देना (लगभग 40 शब्द, 4 अंक)।
प्रारूप: शीर्षक "संदेश" → दिनांक और समय → संबोधन (संबंध के अनुसार; सामूहिक संदेश में "प्रिय साथियो") → मुख्य भाग (अवसर + शुभकामना/बधाई + एक भाव या संकल्प) → प्रेषक (आवश्यक हो तो पद)।
भाषा: भावपूर्ण, संक्षिप्त; बड़ों के लिए आदरसूचक, छोटों के लिए स्नेहपूर्ण।
| अंग | उदाहरण |
|---|---|
| शीर्षक | संदेश |
| दिनांक और समय | दिनांक: 31 दिसंबर 2026 · समय: रात 9 बजे |
| संबोधन | प्रिय मित्र / आदरणीय दादीजी / प्रिय साथियो |
| मुख्य भाग | अवसर + शुभकामना/बधाई + एक भाव या संकल्प |
| प्रेषक | तुम्हारा मित्र, क ख ग |
परीक्षा सुझाव
खंड घ — 20 अंक। हर रूप में प्रारूप के अंक अभ्यास से पक्के करें; विषय-वस्तु के लिए हर उत्तर से पहले एक मिनट योजना बनाएँ।
परीक्षा-परंपरा: नाम-पता न दिया हो तो "परीक्षा भवन" और "क ख ग" लिखें; प्रश्न में नाम दिया हो तो वही लिखें।
आम गलतियाँ
- अनुच्छेद को कई अनुच्छेदों में तोड़ना या संकेत-बिंदुओं को उपशीर्षक बनाना।
- औपचारिक पत्र में विषय-पंक्ति छोड़ना; "तुम्हारा" से समापन।
- संपादक के नाम पत्र में निजी समस्या लिखना।
- स्ववृत्त में घोषणा भूलना या अप्रासंगिक बातें भरना।
- ई-मेल में विषय-पंक्ति खाली छोड़ना।
- विज्ञापन में संपर्क/स्थान न देना या लंबे वाक्य लिखना।
- संदेश में दिनांक-समय या प्रेषक छोड़ना।
- शब्द-सीमा से बहुत लंबा लिखकर दूसरे प्रश्नों का समय गँवाना।