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यह दंतुरित मुसकान; फ़सल — नागार्जुन

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यह दंतुरित मुसकान; फ़सल — नागार्जुन

क्षितिज भाग 2, काव्य खंड · एक घर का कोना, एक देश के खेत

ध्यान दें: दोनों कविताएँ अपनी पाठ्यपुस्तक क्षितिज भाग 2 (NCERT) में अवश्य पढ़ें। यहाँ केवल SOYL की व्याख्या है; कविताओं की कोई पंक्ति यहाँ नहीं दी गई है।

इस पाठ में आप सीखेंगे

  • नागार्जुन के जीवन, उनके नामों और जनकवि के रूप में उनकी पहचान का परिचय दे सकेंगे
  • शिशु की मुसकान के प्रभाव और प्रवासी पिता की भावनाओं को अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे
  • फ़सल को प्रकृति और सामूहिक श्रम का परिणाम मानने के भाव को समझा सकेंगे
  • सरल भाषा, बिंब, पुनरुक्ति और लोक-संवेदना की विशेषताएँ बता सकेंगे
  • काव्यांश पर बहुविकल्पी और 25–30 शब्दों के प्रश्नों के उत्तर दे सकेंगे
स्रोत: CBSE 2026-27 पाठ्यक्रम, खंड ग
बोर्ड में (क्षितिज काव्य खंड, 11 अंक)प्रश्न का रूप
पठित काव्यांशबहुविकल्पी प्रश्न, 5 × 1 अंक
काव्य पाठों पर प्रश्न25–30 शब्दों के उत्तर, 2-2 अंक (4 में से 3)